गंगटोक,अंग भारत। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को गंगटोक में आयोजित भव्य समारोह में सिक्किम पुलिस को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए ‘राष्ट्रपति पुलिस ध्वज’ से सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों एवं जवानों को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की।
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शांति और सुरक्षा में अहम भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि 1897 में स्थापना के बाद से सिक्किम पुलिस ने राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सिक्किम पुलिस ने अपने पेशेवर कार्यशैली और जनता के प्रति मैत्रीपूर्ण व्यवहार से लोगों का भरोसा और सम्मान जीता है।
औपनिवेशिक मानसिकता बदलने की जरूरत
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की पुलिस व्यवस्था पर लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन की छाप रही है। उस दौर में पुलिस का उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि उन पर नियंत्रण रखना था। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पुलिस व्यवस्था पूरी तरह नागरिक-हितैषी बने और पुरानी सोच को त्यागे।राष्ट्रपति ने कहा कि पुलिस को जनता का भागीदार और मार्गदर्शक बनना चाहिए ताकि लोगों में सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हो सके।
महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
राष्ट्रपति मुर्मु ने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति पुलिस को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए ताकि आम नागरिक बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
क्या है ‘राष्ट्रपति पुलिस ध्वज’
उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रपति पुलिस ध्वज’ को ‘राष्ट्रपति का निशान’ भी कहा जाता है। यह सम्मान किसी राज्य या केंद्रीय पुलिस बल को असाधारण सेवा, वीरता और पेशेवर उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। इस सम्मान के बाद संबंधित पुलिस बल के अधिकारी अपनी वर्दी पर विशेष प्रतीक चिह्न धारण कर सकते हैं।











