होर्मुज में बढ़ा तनाव, गोलीबारी की खबरों से हड़कंप
तेहरान/वाशिंगटन,अंग भारत। ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव अचानक बढ़ गया है। 27-28 मई की दरमियानी रात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना और अमेरिकी जहाजों के बीच गोलीबारी और धमाकों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
Read more……….होर्मुज तनाव बढ़ा, अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर की कार्रवाई
टैंकर पर गोलीबारी और जवाबी कार्रवाई का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, एक अमेरिकी टैंकर ने कथित तौर पर रडार सिस्टम बंद कर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश की, जिसके बाद उस पर गोलीबारी की गई। इसके जवाब में अमेरिकी बलों ने ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र के आसपास कार्रवाई की। बंदर अब्बास दक्षिणी ईरान का प्रमुख बंदरगाह शहर है और रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है।
ड्रोन हमले और धमाकों की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बंदर अब्बास के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने चार ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। साथ ही एक भूमिगत कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जहां कथित तौर पर ड्रोन लॉन्च की तैयारी चल रही थी।हालांकि ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
दो दिन पहले भी हुई थी सैन्य कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार यह घटनाक्रम उस सैन्य कार्रवाई के ठीक दो दिन बाद हुआ है, जिसमें मिसाइल लॉन्च साइटों और ईरानी नौसैनिक इकाइयों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, वहां बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों और सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन पर दबाव
वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट बैठक में भी ईरान मुद्दा प्रमुख रहा। रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन पर दोनों राजनीतिक दलों की ओर से संघर्ष समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका केवल एक संतोषजनक समझौता ही स्वीकार करेगा जो अमेरिकी हितों के अनुरूप हो।
शांति वार्ता पर अनिश्चितता
हालांकि पहले संघर्ष विराम और बातचीत के प्रयास किए गए थे, लेकिन अप्रैल में पाकिस्तान में हुई प्रारंभिक वार्ता किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सकी थी। इसके बाद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और अब नए घटनाक्रम ने शांति प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।











