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यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, सेंट पीटर्सबर्ग की तेल रिफाइनरी और सैन्य ठिकाने बने निशाना

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में यूक्रेन का ड्रोन हमला के बाद जलती हुई तेल रिफाइनरी और उठती आग की लपटें।

मॉस्को/कीव/अंग भारत। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। यूक्रेन ने शुक्रवार देर रात रूस पर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया। इस हमले में सैकड़ों लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन ने सेंट पीटर्सबर्ग के पास मौजूद तेल रिफाइनरी, बंदरगाह और कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हमले के बाद कई जगह आग लगने और धुएं के बड़े गुबार उठने की खबरें सामने आई हैं।रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यूक्रेन ने करीब 500 ड्रोन का इस्तेमाल किया। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हमले का वीडियो साझा किया, जिसमें सेंट पीटर्सबर्ग के बंदरगाह स्थित एक तेल सुविधा केंद्र से धुआं उठता दिखाई दे रहा है।

तेल रिफाइनरी और नौसैनिक ठिकानों पर हमला

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन ने सेंट पीटर्सबर्ग बंदरगाह पर बने तेल सुविधा केंद्र के अलावा क्रोनस्टेड नौसैनिक अड्डे के आसपास मौजूद सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। यूक्रेन का दावा है कि उसके ड्रोन अपने तय लक्ष्यों तक पहुंचे और कई जगहों पर नुकसान हुआ।रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया, लेकिन कई ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। मॉस्को के मेयर के अनुसार, राजधानी मॉस्को की ओर भी करीब 200 ड्रोन भेजे गए थे। इसके चलते कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

रूस के अंदर बढ़ रहे यूक्रेन के हमले

पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन लगातार रूस के अंदर मौजूद तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, सैन्य अड्डों और रक्षा उद्योग से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है। इन हमलों में लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन का मकसद रूस की सैन्य आपूर्ति व्यवस्था को कमजोर करना है, ताकि मोर्चे पर तैनात रूसी सेना पर दबाव बढ़ाया जा सके। हाल के दिनों में ऐसे हमलों की संख्या लगातार बढ़ी है।

ईंधन संकट और बिजली कटौती की खबरें

यूक्रेनी हमलों का असर अब रूस के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में ईंधन की कमी की स्थिति बन गई है। पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए गैस स्टेशनों पर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें लोग घंटों इंतजार करते नजर आ रहे हैं।कब्जे वाले क्रीमिया क्षेत्र में भी हालात प्रभावित हुए हैं। वहां ईंधन की कमी के चलते प्रशासन ने आपात स्थिति घोषित कर दी है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कटौती की जा रही है और सुरक्षा के लिहाज से रात के समय कर्फ्यू भी लगाया गया है।

पुतिन ने सैन्य ठिकाने का किया दौरा

ड्रोन हमलों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रात के समय सैन्य वर्दी पहनकर एक सैन्य ठिकाने का दौरा किया। इसे युद्ध की स्थिति का जायजा लेने और सेना का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।रूस की सेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में स्थित अहम शहर कोस्टियान्टिनिव्का पर कब्जा कर लिया है। हालांकि यूक्रेन की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।अगर रूस का यह दावा सही साबित होता है तो इसे इस साल युद्ध के मैदान में उसकी सबसे बड़ी सैन्य सफलता माना जाएगा।

विश्लेषकों ने जताई अलग राय

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस को कुछ इलाकों में बढ़त जरूर मिली है, लेकिन इसकी कीमत भी उसे भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है।पोलैंड के रक्षा विश्लेषक और रोचन कंसल्टिंग के निदेशक कॉनराड मुजिका का कहना है कि रूस की सेना बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है। उनका मानना है कि पिछले कुछ महीनों में रूस ने जितना इलाका अपने कब्जे में लिया, उससे अधिक क्षेत्र अन्य मोर्चों पर गंवाया भी हो सकता है।स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञों और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में भी कहा गया है कि इस युद्ध में रूस को सैनिकों और सैन्य संसाधनों के स्तर पर लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में ड्रोन हमलों के बढ़ते दायरे ने रूस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बनी हुई है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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