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युद्ध की मार भागलपुर सिल्क इंडस्ट्री पर, 25 करोड़ का ऑर्डर रद्द

भागलपुर, अंगभारत। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति का सीधा और गहरा असर बिहार की सिल्क सिटी, भागलपुर के पारंपरिक बुनकर उद्योग पर पड़ा है। वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण भागलपुर के सिल्क निर्यातकों को 25 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर अचानक रद्द होने का सामना करना पड़ा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और लाखों बुनकरों की आजीविका पर संकट के बादल छा गए हैं। यह उद्योग, जो अपनी तसर, मुगा और मटका सिल्क के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान रखता है, इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।

ऑर्डर रद्द होने का कारण

भागलपुर का सिल्क उद्योग लंबे समय से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा रहा है। यहां का उत्पाद अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों में भारी मांग में रहता है। हालांकि, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव ने इस पूरे ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव: दोनों देशों के बीच बढ़ती कड़वाहट का सीधा असर लॉजिस्टिक्स और भुगतान चक्र (Payment Cycle) पर पड़ा है।
  • अमेरिकी टैरिफ नीतियां: आयात शुल्कों में बदलाव के कारण अमेरिकी खरीदारों ने बड़ी खेप लेने से मना कर दिया है।
  • बांग्लादेशी बाजार बंद: पड़ोसी देश बांग्लादेश की बिगड़ती राजनीतिक स्थिति ने एक बड़े निर्यात बाजार के दरवाजे बंद कर दिए हैं।

बुनकरों का दर्द

जब हमने भागलपुर के बुनकर इलाकों का जमीनी दौरा किया, तो नजारा वाकई डराने वाला था। कई घरों में चलने वाले लूम (करघे) पूरी तरह से शांत पड़े थे। बुनकर हेमंत कुमार और आलोक कुमार ने बताया कि किस तरह वे कोरोना की मार से उबर ही रहे थे कि इस नए संकट ने उनकी कमर तोड़ दी।

हेमंत कुमार कहते हैं, “जैसे ही हम अपने काम को पटरी पर लाने की कोशिश करते हैं, कोई न कोई वैश्विक संकट सामने खड़ा हो जाता है। 25 करोड़ रुपये के ऑर्डर का कैंसिल होना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, यह हजारों घरों के चूल्हे ठंडे होने की कहानी है।”

लूम छोड़ने की मजबूरी

आलोक कुमार के अनुसार, लंबे समय तक काम न मिलने और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण बुनकर अब अपने लूम बेचने पर मजबूर हो रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भागलपुर की दशकों पुरानी कला का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

“एक समय था जब विदेशों में भागलपुर सिल्क की धूम थी, लेकिन अब हालात इतने खराब हैं कि कई बुनकर काम छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने की सोच रहे हैं।” — आलोक कुमार, स्थानीय बुनकर।

सिल्क की प्रमुख किस्में

भागलपुर में तैयार होने वाला सिल्क अपनी मजबूती और विशिष्ट बुनावट के लिए जाना जाता है। नीचे दी गई तालिका यहां के प्रमुख सिल्क प्रकारों को दर्शाती है:

सिल्क का प्रकार विशेषता
तसर (Tussar) स्वर्ण रंग और प्राकृतिक मजबूती
मटका (Matka) मोटे धागे से बनी पारंपरिक बुनावट
मुगा (Muga) अपनी चमक के लिए प्रसिद्ध
अरंडी (Eri) कोमलता और स्थायित्व

भविष्य पर चिंताएं

सिल्क सिटी की साख बचाने के लिए अब केवल स्थानीय मेहनत काफी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम होने के कारण बुनकरों को अब सरकारी प्रोत्साहन और वैकल्पिक बाजारों की तलाश है। यदि तत्काल राहत नहीं दी गई, तो न केवल यह उद्योग दम तोड़ देगा, बल्कि भारत की एक सांस्कृतिक धरोहर भी इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी। भागलपुर के इन बुनकरों की हालत वाकई चिंताजनक है और इन्हें इस वैश्विक मार से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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