सुपौल,बिहार,अंग भारत| नगर परिषद क्षेत्र के लालपट्टी मॉल के समीप पुलिस ने बुधवार की देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 वर्षीय नाबालिग अंकित कुमार को 28.74 ग्राम स्मैक के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किशोर पतरघटी निवासी सुमारी सरदार का पुत्र है। तलाशी के दौरान उसके पास से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। इस गिरफ्तारी ने सुपौल शहर में चल रहे अवैध ड्रग्स रैकेट और उसमें नाबालिगों के इस्तेमाल की गंभीर सच्चाई को एक बार फिर सामने ला दिया है।
स्मैक की पूरी बरामदगी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से कुल 28.74 ग्राम स्मैक जब्त की। इस बरामदगी को दो हिस्सों में देखा जा सकता है, जो इसके व्यावसायिक इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। पुलिस को तलाशी के दौरान मुख्य पैकेट में 24.41 ग्राम खुली स्मैक मिली। इसके साथ ही, उसके पास से 28 छोटी-छोटी पुड़िया भी बरामद हुईं, जिनमें कुल 4.33 ग्राम स्मैक भरी हुई थी। इन पुड़िया का मिलना साफ तौर पर दर्शाता है कि यह स्मैक केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं थी, बल्कि इसे स्थानीय खरीदारों और युवाओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बेचने की तैयारी की गई थी।
थानाध्यक्ष का बयान
मामले की पुष्टि करते हुए थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर लालपट्टी मॉल के पास संदिग्ध गतिविधि देख पुलिस टीम ने जाल बिछाया था। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वहां ड्रग्स की सप्लाई करने की योजना थी। थानाध्यक्ष राकेश कुमार के अनुसार, आरोपी अंकित कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नाबालिग को स्मैक की इतनी बड़ी खेप कहां से मिली थी और इस पूरे सिंडिकेट के पीछे कौन से बड़े तस्कर शामिल हैं।
मॉल बने नए हॉटस्पॉट
बिहार के छोटे शहरों में भी अब शहरीकरण के साथ-साथ अपराध के तौर-तरीके बदल रहे हैं। लालपट्टी मॉल जैसे भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक स्थल अब तस्करों के लिए आसान ठिकाने बनते जा रहे हैं। मॉल और उसके आसपास युवाओं की भारी आवाजाही होती है, जिसका फायदा उठाकर ड्रग पेडलर आसानी से अपने ग्राहकों से संपर्क कर लेते हैं। भीड़भाड़ के बीच पुलिस की नजरों से बचना आसान होता है, इसलिए देर शाम या रात के समय इन इलाकों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों को भी अब अपने आस-पास होने वाली ऐसी संदिग्ध हरकतों पर नजर रखनी होगी।
नाबालिगों का इस्तेमाल
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ड्रग तस्कर अब अपने काले कारोबार के लिए 18 साल से कम उम्र के बच्चों को ढाल बना रहे हैं। नाबालिगों का इस्तेमाल करने के पीछे तस्करों की एक सोची-समझी रणनीति होती है। उन्हें लगता है कि पुलिस बच्चों पर जल्दी शक नहीं करेगी। इसके अलावा, यदि वे पकड़े भी जाते हैं, तो किशोर न्याय अधिनियम के तहत उन्हें वयस्कों की तुलना में कम सजा या जल्दी सुधार गृह से छुट्टी मिल जाती है। सुमारी सरदार के पुत्र अंकित कुमार की गिरफ्तारी इसी कड़वी सच्चाई का सबूत है कि कैसे गरीब और भटके हुए युवाओं को इस दलदल में धकेला जा रहा है।
अभिभावकों के लिए चेतावनी
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक बड़ा अलार्म हैं। माता-पिता को अपने बच्चों की बदलती आदतों, उनके दोस्तों के सर्कल और अचानक होने वाले व्यवहारिक बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें देखकर अभिभावक सतर्क हो सकते हैं:
- बिना किसी ठोस वजह के देर रात तक घर से बाहर रहना या बार-बार बाहर जाना।
- अचानक जेब खर्च की मांग बढ़ जाना या घर से पैसे गायब होना।
- गुमसुम रहना, पढ़ाई से मन हटना और नींद के पैटर्न में अचानक बदलाव आना।
- बिना वजह चिड़चिड़ापन होना या नए और संदिग्ध दोस्तों के संपर्क में आना।
अगर समय रहते इन बदलावों को पहचान लिया जाए, तो किसी भी बच्चे को अपराधी या नशेड़ी बनने से बचाया जा सकता है। सामाजिक जागरूकता ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
पुलिस की अगली चुनौती
थानाध्यक्ष राकेश कुमार और उनकी टीम के लिए अंकित कुमार की गिरफ्तारी सिर्फ एक शुरुआत है। असली चुनौती उस मुख्य तस्कर तक पहुंचने की है, जो इस इलाके में स्मैक की सप्लाई चेन चला रहा है। सुपौल पुलिस को अब अपनी पेट्रोलिंग तेज करने के साथ-साथ स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत करना होगा। सीमावर्ती जिलों से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाने की जरूरत है। जब तक सप्लाई चेन को जड़ से नहीं काटा जाएगा, तब तक ऐसे छोटे पेडलर बनते रहेंगे और युवा पीढ़ी बर्बाद होती रहेगी।








