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स्कूल बस दुर्घटना पर फूटा गुस्सा, सड़क जाम

नवादा, अंग भारत। बिहार के नवादा जिले में सोमवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसे में एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई और 27 अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। गोविंदपुर थाना क्षेत्र के कमलापुर रोड पर बेला गांव के निकट मगध सेंट्रल स्कूल की बस के अनियंत्रित होकर 20 फीट गहरे गड्ढे में पलटने से यह हृदयविदारक घटना घटी। इस दुर्घटना के बाद नाराज अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आज एक मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

हादसे की भयावह स्थिति

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस पूरी तरह से खचाखच भरी हुई थी। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना पहले से ही खतरे की घंटी थी। बेला गांव के पास एक तीखे और खतरनाक मोड़ पर बस की रफ्तार अनियंत्रित हो गई। बस चालक वाहन पर अपना काबू नहीं रख सका और बस सड़क से नीचे गहरे गड्ढे में जा गिरी। बस गड्ढे में गिरते समय तीन बार पलटी, जिससे अंदर बैठे बच्चों के बीच चीख-पुकार मच गई।

  • मृतक छात्रा: आरोही कुमारी (पिता: अमित कुमार, निवासी दर्शन गांव)।
  • घायल: 27 बच्चे, जिनमें से 4 की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
  • बचाव कार्य: स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्चों को बस से बाहर निकाला।

प्रबंधन की घोर लापरवाही

इस हादसे के बाद अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि न तो बसों की समय-समय पर फिटनेस जांच होती है और न ही ड्राइवरों के लाइसेंस या उनके व्यवहार की मॉनिटरिंग की जाती है।

बस में बच्चों को क्षमता से कहीं ज्यादा बिठाना इस बात का प्रमाण है कि स्कूल के लिए मुनाफा, बच्चों की सुरक्षा से कहीं ज्यादा बढ़कर था। जिस रफ्तार से बस दौड़ रही थी, वह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था। यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर स्कूल प्रशासन द्वारा की गई आपराधिक लापरवाही है।

अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्था

घटना के बाद जब बच्चों को नवादा सदर अस्पताल लाया गया, तो वहां के हालात देखकर अभिभावकों का पारा और चढ़ गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में घायलों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के अभाव में बच्चों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो गया। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में भी भारी आक्रोश व्यक्त किया। अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिलने से लोगों में शासन के प्रति गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।

सड़क जाम और विरोध

हादसे की खबर फैलते ही इलाके में तनाव पैदा हो गया। ग्रामीणों ने सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे यातायात घंटों बाधित रहा। लोगों की मांग है कि:

  • स्कूल प्रबंधन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
  • पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले।
  • जिले के सभी स्कूलों में चलने वाली बसों की अनिवार्य जांच हो।
  • लापरवाह ड्राइवरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

प्रशासन की जिम्मेदारी

पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। उन्होंने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालांकि, सवाल यह है कि कब तक मासूम बच्चे अपनी जान गंवाते रहेंगे? स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग के नियम बहुत सख्त हैं, लेकिन धरातल पर उनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जब तक इन नियमों का पालन सख्ती से नहीं होगा, तब तक ऐसी दुखद घटनाओं को रोकना असंभव है। नवादा की इस घटना ने शिक्षा माफियाओं की पोल खोलकर रख दी है, जो बच्चों के भविष्य के नाम पर उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।

फिलहाल, घायल बच्चों को बेहतर उपचार दिलाने की कोशिशें जारी हैं। पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है और हर किसी की जुबान पर बस यही सवाल है कि आखिर कौन है इस मौत का असली जिम्मेदार?

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अंग भारत • रिपोर्टर

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