फुल्लीडुमर (बांका),अंग भारत। प्रखंड क्षेत्र के कैथा पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या एक स्थित कनौदी गांव में रविवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। संपर्क पथ निर्माण की मांग को लेकर गांव के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। दोपहर करीब दो बजे बैनर और तख्तियां लेकर ग्रामीण सड़कों पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
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ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे लोग
प्रदर्शन में गांव के कई लोग शामिल हुए, जिनमें गणेश राय, प्रताप राय, पंचानंद, उपेंद्र, सुभाष, संजीत, दीपक, रंजीत, पंकज, गुलशन, रमेश, विक्की, सोनू, नितेश, रामानंद, प्रमोद, बबलू, राजीव और इंद्रदेव समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वर्षों से सड़क की समस्या जस की तस बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
डेढ़ किलोमीटर कच्चा रास्ता बना बड़ी समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि कनौदी गांव में करीब 50 परिवार रहते हैं। पंचायत स्तर पर गांव के भीतर पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है, लेकिन गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा संपर्क पथ आज भी कच्चा है। यह कच्चा रास्ता बरसात के मौसम में कीचड़ से भर जाता है, जिससे लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
बीमार और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और बीमार लोगों को झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, ताकि उन्हें अस्पताल ले जाया जा सके। यह स्थिति गांव के लिए बेहद चिंताजनक है।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में निराशा और गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
वोट बहिष्कार की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही संपर्क पथ को पक्का नहीं कराया गया, तो आगामी चुनाव में पूरा गांव मतदान का बहिष्कार करेगा। उनका कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता।ग्रामीणों का यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। अब देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक गांव को पक्की सड़क की सुविधा मिल पाती है।










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