गुवाहाटी,अंग भारत। देशभर के साथ-साथ असम में भी गुरुवार को ईद-उल-जुहा का पर्व धार्मिक श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। हिजरी कैलेंडर के अनुसार जिल्हज्ज माह की 10वीं तारीख को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर मुस्लिम समुदाय में सुबह से ही खासा उत्साह देखने को मिला।
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मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की गई नमाज
केंद्रीय हिलाल कमेटी द्वारा ईद की घोषणा के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में ईद-उल-जुहा की नमाज अदा की गई। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाह मैदानों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने सामूहिक नमाज अदा कर देश में अमन, शांति, तरक्की और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी।नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों और युवाओं में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
त्याग और समर्पण का पर्व है ईद-उल-जुहा
ईद-उल-जुहा को ईद-उल-अजहा, बकरीद और कुरबानी ईद के नाम से भी जाना जाता है। यह इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व माना जाता है। ‘ईद-उल-जुहा’ का अर्थ त्याग और समर्पण का पर्व होता है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुरबानी की रस्म निभाते हैं।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से राज्यभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई और प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा।
प्रेम और मानवता का संदेश देता है पर्व
ईद-उल-जुहा का पर्व समाज में प्रेम, त्याग, समर्पण और मानवता का संदेश देता है। यह त्योहार आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का प्रतीक माना जाता है।










