पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर दोनों गुटों के दावे की होगी समीक्षा
कोलकाता,अंग भारत। तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के 10 विधायक नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इस सुनवाई में बागी गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी निधि पर अपने अधिकार का दावा पेश करेगा। वहीं आयोग दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई करेगा।
निर्वाचन आयोग ने पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई का दिया समय
बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार, उनके समूह ने पहले ही निर्वाचन आयोग से सुनवाई का समय मांगा था। इसके बाद आयोग ने दो जुलाई को पूर्ण पीठ के समक्ष पेश होने का अवसर दिया। सुनवाई में शामिल होने के लिए बागी गुट के विधायक बुधवार शाम नई दिल्ली रवाना हो गए।बागी खेमे का कहना है कि उसने अपने दावे के समर्थन में सभी आवश्यक प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज पहले ही निर्वाचन आयोग को सौंप दिए हैं। अब आयोग इन दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करेगा।
22 जून के फैसले के बाद तेज हुआ राजनीतिक संघर्ष
तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद 22 जून को और गहरा गया, जब बागी गुट ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 10 सदस्यीय उपसमिति के गठन की घोषणा की। इसी बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया और वरिष्ठ विधायक अरूप राय को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया।इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक और कानूनी विवाद खुलकर सामने आ गया। दोनों गुट अपने-अपने दावों को मजबूत बताते हुए निर्वाचन आयोग के समक्ष कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
बहुमत के आधार पर बागी गुट का दावा
बागी गुट का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक उसके समर्थन में हैं, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ केवल 20 विधायक हैं। इसी बहुमत के आधार पर बागी गुट का कहना है कि पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार पर उसका दावा अधिक मजबूत बनता है।इसके अलावा बागी गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष यह तर्क भी रखा है कि उसके साथ मौजूद विधायकों के औसत मतों की गणना करने पर लगभग 48 लाख वोट उसके पक्ष में आते हैं। गुट का कहना है कि यह संख्या निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानदंड से अधिक है, जबकि दूसरे पक्ष के पास आवश्यक मतों का समर्थन नहीं है।
निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
इस पूरे विवाद के बीच अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ की सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह सुनवाई तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।हालांकि अंतिम निर्णय तत्काल आने की संभावना नहीं है। निर्वाचन आयोग दोनों पक्षों की दलीलों, प्रस्तुत दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद ही अपना फैसला सुनाएगा। ऐसे में इस मामले का परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।











