काठमांडू, अंग भारत। नेपाल में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और देश के अलग-अलग हिस्सों में भड़के विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का सीधा मकसद देश की कानून-व्यवस्था को वापस पटरी पर लाना और समाज में आपसी भाईचारे को बिगड़ने से बचाना है। बैठक में हाल ही में सुनसरी में हुई हिंसक झड़पों के बाद उपजे हालातों पर गंभीर चर्चा की गई। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि देश की अखंडता और सामाजिक ताने-बाने से खिलवाड़ करने वाले तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। इसके लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को आपस में बेहतर तालमेल बिठाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
“देश की सुरक्षा और सामाजिक एकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सभी सुरक्षा एजेंसियां आपसी मतभेदों को भुलाकर एक टीम की तरह काम करें।” – राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक का मुख्य संदेश।
बैठक का एजेंडा
सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर था कि भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं को कैसे रोका जाए। 25 जुलाई को सुनसरी में जो घटना हुई, उसने स्थानीय प्रशासन के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। सुरक्षा परिषद के सदस्य सचिव और रक्षा सचिव केदारनाथ शर्मा ने बताया कि बैठक में देश के ताजा सुरक्षा हालातों का गहराई से आकलन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा। सुरक्षा बलों को पहले से ही मुस्तैद रहना होगा। यानी जहां भी तनाव की आशंका हो, वहां पहले ही प्रशासनिक कदम उठा लिए जाएं।
किसने क्या कहा
इस बैठक में सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि केवल बल प्रयोग से शांति स्थापित नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए जनता का विश्वास जीतना भी उतना ही जरूरी है। बैठक में शामिल प्रमुख लोगों की सूची नीचे दी गई है:
| नाम | पद और जिम्मेदारी | बैठक में मुख्य योगदान |
|---|---|---|
| बालेन्द्र शाह | प्रधानमंत्री / अध्यक्ष | रणनीतिक दिशा निर्देश देना और समन्वय बनाना |
| सुदन गुरूंग | गृह मंत्री | आंतरिक सुरक्षा और पुलिस बल की तैनाती की समीक्षा |
| शिशिर खनाल | विदेश मंत्री | स्थानीय संवाद और राजनीतिक दलों के साथ तालमेल की जानकारी |
| स्वर्णिम वागले | वित्त मंत्री | सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए बजट पर चर्चा |
| अशोक सिग्देल | प्रधान सेनापति (नेपाली सेना) | आपातकालीन स्थिति में सेना की तैयारियों की पुष्टि |
| केदारनाथ शर्मा | रक्षा सचिव / सदस्य सचिव | सुरक्षा नीतियों के क्रियान्वयन का रोडमैप पेश करना |
सुनसरी की स्थिति
सुनसरी में भड़की हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बैठक के बाद बताया कि राजनीतिक दलों, स्थानीय नेताओं और पुलिस प्रशासन के मिले-जुले प्रयासों से वहां शांति बहाल हो रही है। लेकिन यह शांति बनी रहे, इसके लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुनसरी की घटना हमारे लिए एक बड़ा सबक है। अगर समय रहते स्थानीय स्तर पर समुदायों के बीच चल रहे छोटे विवादों को न सुलझाया गया, तो असामाजिक तत्व इसका फायदा उठा सकते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर संवाद की प्रक्रिया को कभी नहीं रोका जाना चाहिए।
सुरक्षा के नए उपाय
सुरक्षा परिषद की इस बैठक में केवल चर्चा नहीं हुई, बल्कि जमीन पर काम करने के लिए कुछ ठोस फैसले भी लिए गए। सरकार ने माना कि तकनीक और आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करके भीड़ को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- स्थानीय संवाद: हर जिले में स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज के बीच बातचीत की प्रक्रिया को लगातार चालू रखा जाएगा ताकि गलतफहमियां दूर हों।
- भीड़ नियंत्रण की ट्रेनिंग: सुरक्षा बलों को ऐसी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी जिससे वे कम से कम बल प्रयोग करके उग्र भीड़ को काबू में कर सकें।
- संसाधनों का आवंटन: गृह मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वह सुरक्षा बलों को आधुनिक दंगा नियंत्रण उपकरण और संचार साधन तुरंत उपलब्ध कराए।
- अफवाहों पर रोक: सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले और अफवाह उड़ाने वाले खातों पर पैनी नजर रखी जाएगी और उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होगी।
शांति के लिए साझा प्रयास
नेपाल में रहने वाले हर नागरिक को यह समझना होगा कि देश का विकास केवल शांतिपूर्ण माहौल में ही संभव है। जब तक लोग खुद शांति के लिए आगे नहीं आएंगे, तब तक केवल पुलिस के दम पर अमन कायम नहीं रखा जा सकता। सरकार ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग, धार्मिक गुरुओं और स्थानीय युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। समाज में भाईचारा बनाए रखने के लिए स्थानीय क्लबों और संगठनों को भी जिम्मेदारी संभालनी होगी। सेना के प्रधान सेनापति अशोक सिग्देल ने भी आश्वस्त किया है कि नेपाली सेना देश की संप्रभुता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए हर समय तैयार खड़ी है।







