गुवाहाटी,अंग भारत। असम में विनाशकारी बाढ़ का पानी भले ही अब तेजी से घटने लगा है, लेकिन इसके पीछे छूटी तबाही ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। खेतों में लहलहाती फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, और घरों, सड़कों व स्कूलों में पानी के साथ आई गाद और मिट्टी की मोटी परत जम गई है। इस जमी हुई गाद ने लोगों के सामने जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आपदा की इस मार से त्रस्त नागरिकों की आंखों में एक अजीब सा खालीपन और लाचारी साफ देखी जा सकती है। सरकारी तंत्र की तमाम कोशिशों और दावों के बावजूद असम में बाढ़ से अब तक कुल 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें हाल ही में दर्ज हुई दो और मौतें शामिल हैं। धनसिरी (नुमालीगढ़) नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे लोगों के मन में डर बना हुआ है।
तबाही के बाद के हालात
बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी सरक तो रहा है, लेकिन अपने पीछे बर्बादी के गहरे निशान छोड़ गया है। लोग जब राहत शिविरों से लौटकर अपने घरों को देख रहे हैं, तो वहां सिर्फ कीचड़ और मलबा नजर आ रहा है। स्कूलों की इमारतें कीचड़ से पटी पड़ी हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है। किसानों की मेहनत पर पूरी तरह पानी फिर चुका है। इस तबाही ने असम के ग्रामीण इलाकों की कमर तोड़ दी है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सोशल मीडिया पर बताया कि विधानसभा के बजट सत्र के तुरंत बाद राज्य सरकार के सभी मंत्री सीधे जमीन पर उतरेंगे और प्रभावित इलाकों का खुद दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे।
प्रभावित जिलों का हाल
असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य के कुल 9 जिले अभी भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में बुरी तरह फंसे हुए हैं। इन जिलों के नाम इस प्रकार हैं:
- चराईदेव
- गोलाघाट
- जोरहाट
- शिवसागर
- होजाई
- कामरूप
- नगांव
- कामरूप (मेट्रो)
- डिब्रूगढ़
इन 9 जिलों के कुल 24 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 763 गांव इस समय पूरी तरह या आंशिक रूप से जलमग्न हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय राज्य की 5,24,733 आबादी सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित है। इसके अलावा 48,742.09 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है, जिससे आने वाले समय में फसलों के उत्पादन और किसानों की आजीविका पर गहरा असर पड़ना तय है।
राहत शिविरों का गणित
असम सरकार ने प्रभावित लोगों को तुरंत मदद पहुंचाने के लिए राहत कार्यों का जाल फैलाया है। इसके तहत पूरे प्रभावित क्षेत्र में राहत शिविर और वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं:
- कुल स्थापित शिविर: राज्य में कुल 345 राहत केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 109 मुख्य राहत शिविर और 245 राहत सामग्री वितरण केंद्र शामिल हैं।
- आश्रय लिए लोग: इन राहत शिविरों में इस वक्त 37,724 लोग रह रहे हैं, जिन्हें रहने और खाने की बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं।
- गैर-शिविर निवासी: करीब 1,53,833 ऐसे लोग हैं जो राहत शिविरों में नहीं रह रहे हैं, लेकिन सरकार के राहत वितरण केंद्रों से राशन और जरूरी सहायता सामग्री प्राप्त कर रहे हैं।
बेजुबान जानवरों पर कहर
इस बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ मवेशियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 88,240 जानवर इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें 45,895 बड़े पशु, 26,335 छोटे पशु और 16,010 मुर्गियां शामिल हैं। बाढ़ के तेज बहाव में कुल 26,512 जानवर बह गए। चराईदेव जिले में 9,973 पशु और शिवसागर जिले में 1,65,395 पशु पानी के तेज बहाव में बह गए, जिससे पशुपालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में 26 जुलाई को चराईदेव जिले से दो और शव बरामद किए गए, जो बाढ़ की भयावहता को दर्शाते हैं।
मकानों को पहुंचा नुकसान
बाढ़ के पानी ने हजारों परिवारों के सिर से छत छीन ली है। कच्चे और पक्के मकानों को हुए नुकसान का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। 26 जुलाई तक की रिपोर्ट के मुताबिक मकानों की क्षति का विवरण इस प्रकार है:
- पूरी तरह क्षतिग्रस्त कच्चे मकान: कुल 579 कच्चे मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर में हुआ है जहां 560 मकान टूटे हैं, जबकि जोरहाट में 19 मकान नष्ट हुए।
- आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान: कुल 1,560 कच्चे मकान आंशिक रूप से टूटे हैं, जिनमें से 1,500 शिवसागर में और 60 जोरहाट जिले में हैं।
- पक्के मकानों को नुकसान: कुल 51 पक्के मकानों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है, जिसमें से 45 शिवसागर और 6 जोरहाट में हैं।
- झोपड़ियां और मवेशी शेड: शिवसागर जिले में 250 झोपड़ियां पूरी तरह तबाह हो गईं। इसके अलावा, कुल 792 मवेशी शेड नष्ट हुए हैं, जिनमें से शिवसागर जिले में 250 और जोरहाट जिले में 12 शेड शामिल हैं।
राहत और बचाव अभियान
इस मुश्किल घड़ी में जिंदगियां बचाने के लिए राज्य और देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं। राहत और बचाव कार्य में एसडीआरएफ (SDRF), भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ (NDRF), डीडीआरएफ (DDRF), वायुसेना, स्थानीय पुलिस, नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक और अग्निशमन सेवाएं पूरी ताकत से जुटी हुई हैं।
राहत कार्यों को रफ्तार देने के लिए मैदान में 36 नावें और दो विशेष हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं ताकि बेहद दुर्गम इलाकों में भी फंसे लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखने के लिए प्रभावित इलाकों में 152 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है ताकि पानी घटने के बाद फैलने वाली बीमारियों पर काबू पाया जा सके।
वितरित राहत सामग्री
प्रभावित लोगों और जानवरों के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री का वितरण किया है, जिसका ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| सामग्री का नाम | कुल वितरित मात्रा |
|---|---|
| चावल | 3302.548 क्विंटल |
| दाल | 590.998 क्विंटल |
| नमक | 177.3761 क्विंटल |
| सरसों का तेल | 17735.95 लीटर |
| पशुओं का चारा (गेहूं का चोकर) | 446.24 क्विंटल |
| पशुओं का चारा (चावल का चोकर) | 146.21 क्विंटल |
बाढ़ के कारण राज्य के बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, पुलों और अन्य सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरकार लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है ताकि पानी उतरते ही युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम शुरू किया जा सके और लोगों का जीवन सामान्य हो सके।








