वाशिंगटन, अंग भारत। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने भारी दबाव और तीखी आलोचना के बाद ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष में हताहत हुए अमेरिकी सैनिकों के आधिकारिक आंकड़ों को अपडेट कर दिया है। इस नए बदलाव के तहत शनिवार को डेटाबेस में अचानक 140 अतिरिक्त घायल सैनिकों और पिछले हफ्ते ईरानी हमलों में जान गंवाने वाले 4 अमेरिकी सैनिकों के नाम शामिल किए गए हैं। पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों में इस बड़ी देरी को लेकर अमेरिकी मीडिया और संसद में भारी नाराजगी है। रक्षा मंत्रालय ने अब माना है कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से अब तक कुल 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 624 सैनिक घायल हुए हैं।
नए आंकड़े क्या हैं?
पेंटागन के हालिया अपडेट के बाद अमेरिकी सेना के नुकसान की एक अलग तस्वीर सामने आई है। रक्षा विभाग के डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (DCAS) में अब जो आंकड़े दर्ज हैं, वे पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। इस नए अपडेट को हम इस तरह समझ सकते हैं:
- कुल मौतें: 28 फरवरी से अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।
- कुल घायल: वर्तमान में कुल 624 सैनिक इस संघर्ष में घायल घोषित किए गए हैं।
- हालिया बदलाव: आखिरी अपडेट में 140 नए घायलों और पिछले सप्ताह मारे गए 4 सैनिकों के नाम जोड़े गए हैं।
ये संख्या दर्शाती है कि सीमा पर स्थिति कितनी संवेदनशील है। प्रशासन इन आंकड़ों को दबाने या धीरे-धीरे जारी करने के आरोपों से घिर गया है। सैन्य परिवारों और देश के सामने वास्तविक आंकड़े समय पर आना पारदर्शिता के लिए जरूरी माना जाता है।
विवाद की वजह
आंकड़ों में इस अचानक उछाल ने अमेरिकी जनता और नीति निर्माताओं को हैरान कर दिया है। दरअसल, जब पिछले हफ्ते ईरान ने भीषण हमला किया, तब पेंटागन ने हताहतों की सही जानकारी तुरंत साझा नहीं की थी। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि सैन्य हताहतों की संख्या को छिपाने या उसमें देरी करने से सेना के मनोबल पर बुरा असर पड़ता है। जब तक मीडिया ने इस मामले को तूल नहीं दिया, तब तक आधिकारिक तौर पर इन सैनिकों के नाम लिस्ट में शामिल नहीं किए गए थे। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि क्या प्रशासन जानबूझकर युद्ध के नुकसान को कम करके दिखाना चाहता था।
नया ट्रैकिंग सिस्टम
आलोचनाओं से बचने और अपनी व्यवस्था को सुधारने के लिए पेंटागन ने एक नया रास्ता निकाला है। उसने अपने कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम में बदलाव किया है। अब डेटाबेस में ‘ओवरसीज ऑपरेशन्स’ (Overseas Operations) नाम की एक नई ट्रैकिंग कैटेगरी जोड़ी गई है। इस नई श्रेणी का मकसद विदेशों में चल रहे संघर्षों में हताहत होने वाले सैनिकों का अलग और स्पष्ट रिकॉर्ड रखना है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सिर्फ नई कैटेगरी बना देने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती, बल्कि डेटा को समय पर और बिना किसी देरी के अपडेट करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
राजनीतिक दबाव बढ़ा
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। जो बाइडन प्रशासन और रक्षा विभाग पर विपक्षी दलों के साथ-साथ खुद उनकी पार्टी के नेताओं ने भी उंगलियां उठानी शुरू कर दी हैं। अमेरिकी संसद की बेहद ताकतवर सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के 12 डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। इन सांसदों ने गुरुवार को सीधे रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) को एक कड़ा पत्र लिखा। सांसदों ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी विसंगति कैसे हुई और घायल सैनिकों का डेटा समय पर क्यों नहीं अपडेट किया गया।
सांसदों के सवाल
सांसदों ने अपने पत्र में कुछ बेहद तीखे सवाल उठाए हैं जिन पर रक्षा मंत्री से जवाब मांगा गया है:
- पेंटागन की वेबसाइट पर हताहतों का आंकड़ा अपडेट होने में इतनी देरी क्यों हुई?
- क्या यह कोई तकनीकी समस्या थी या जानबूझकर जानकारी को रोका गया था?
- भविष्य में इस तरह की चूक को रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय क्या ठोस कदम उठा रहा है?
इस पत्र के बाद रक्षा मंत्री और उनके सहयोगियों पर जवाब देने का भारी दबाव बन गया है। सांसदों ने इस बात पर जोर दिया है कि देश के लिए जान देने वाले जवानों के डेटा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
तकनीकी गड़बड़ी का बहाना
चौतरफा घिरने के बाद पेंटागन के अधिकारियों ने सफाई देने की कोशिश की है। रक्षा विभाग के कार्यवाहक प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। वाल्डेज ने दावा किया कि वेबसाइट पर डेटा में कुछ अस्थायी तकनीकी रुकावट आ गई थी, जिसके कारण सही संख्या दिखाई नहीं दे रही थी। उन्होंने इसे केवल एक सिस्टम एरर बताया।
वहीं, पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने भी इसी सुर में बात की। पार्नेल ने गुरुवार को एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम की साइट में अस्थाई डेटा व्यवधान के कारण यह गड़बड़ी हुई थी। हालांकि, पार्नेल ने इस दौरान न्यूयॉर्क टाइम्स पर भी निशाना साधा, जिसने सबसे पहले इस खबर को उजागर किया था। पार्नेल का कहना था कि मीडिया ने इस तकनीकी खराबी को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
मीडिया की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले इस बात का पर्दाफाश किया था कि पेंटागन की वेबसाइट पर जो डेटा दिखाया जा रहा है, वह हकीकत से मेल नहीं खाता। इसके बाद सीएनएन और सीबीएस न्यूज जैसे बड़े चैनलों ने भी इस खबर को प्रमुखता से चलाया।
अगर मीडिया ने इस विसंगति को उजागर न किया होता, तो शायद प्रशासन इतनी जल्दी डेटा दुरुस्त करने के लिए कदम नहीं उठाता। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध के समय सटीक और पारदर्शी जानकारी कितनी महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर तब जब सैनिकों की जान दांव पर लगी हो।








