भागलपुर,अंग भारत। गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान से भागलपुर जिले के कई प्रखंड इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। लगातार बढ़ते पानी ने कई गांवों और इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। ऐसे मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी बनी हुई है। घर और स्कूल से दूर होने के कारण बच्चों की शिक्षा का सिलसिला टूटने की आशंका थी। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत शिविरों में बच्चों के लिए अस्थायी विद्यालय शुरू करने की पहल की है।
राहत शिविर में तैयार हुआ स्कूल जैसा माहौल
जिलाधिकारी के निर्देश पर भागलपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित राहत शिविर में बच्चों के लिए अस्थायी स्कूल शुरू किया गया है। बाढ़ की वजह से अपने घर और मूल स्कूल से दूर रहने वाले बच्चों को यहां पढ़ाई का नियमित माहौल देने की कोशिश की जा रही है। शिविर के भीतर बनाए गए इस अस्थायी विद्यालय को सामान्य स्कूल की तरह ही व्यवस्थित किया गया है।बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क लगाए गए हैं। पढ़ाई के लिए ब्लैक बोर्ड की भी व्यवस्था की गई है। नियुक्त शिक्षक और शिक्षिकाएं नियमित रूप से बच्चों की कक्षाएं ले रहे हैं। इससे राहत शिविर में रह रहे बच्चों को पढ़ाई का माहौल मिल रहा है और वे बाढ़ के कारण बनी परेशानी के बीच भी अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं।
बाढ़ के डर से पढ़ाई के माहौल तक पहुंचे बच्चे
बाढ़ ने इन बच्चों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। जिन बच्चों का समय सामान्य दिनों में घर और स्कूल के बीच गुजरता था, वे अब राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई बच्चों ने अपने घरों और स्कूलों से दूर होने के कारण पढ़ाई से दूरी बना ली थी। ऐसे में राहत शिविर के भीतर ही स्कूल शुरू होने से उन्हें फिर से पढ़ाई से जुड़ने का अवसर मिला है।कुछ दिन पहले तक जिन बच्चों के सामने बाढ़ की भयावह तस्वीर थी, वे अब सुबह होते ही कॉपी-किताब लेकर अस्थायी स्कूल पहुंच रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सामान्य जीवन की ओर लौटने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत भी है। शिक्षकों की मौजूदगी से शिविर में बच्चों के बीच पढ़ाई को लेकर उत्साह भी दिखाई दे रहा है।
किताबी पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियां
अस्थायी विद्यालय में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बाढ़ जैसी आपदा का असर बच्चों के मन पर भी पड़ता है। घर, स्कूल और अपने परिचित माहौल से अचानक दूर हो जाने के कारण उनके भीतर डर और तनाव पैदा होना स्वाभाविक है। इसे ध्यान में रखते हुए पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों और मनोरंजन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।बच्चों को ऐसे माहौल में रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे वे कुछ समय के लिए बाढ़ से जुड़ी परेशानियों को भूल सकें। खेल, मनोरंजन और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों के जरिए बच्चों को व्यस्त रखने के साथ उनका मानसिक तनाव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
आपदा के बीच शिक्षा को जारी रखना मकसद
जिला प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि बाढ़ की इस विकट परिस्थिति में भी बच्चों की शिक्षा का क्रम बाधित न हो। प्रशासन मानता है कि आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्य के साथ बच्चों की पढ़ाई को जारी रखना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत राहत शिविर में स्कूल जैसी व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि बच्चों को अपने मूल विद्यालय खुलने का इंतजार न करना पड़े।शिक्षकों को नियमित रूप से बच्चों की कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह रुकने से बचाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्हें ऐसा माहौल देने का प्रयास है, जहां वे सुरक्षित रहते हुए पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में शामिल हो सकें।
अभिभावकों ने पहल को बताया सराहनीय
राहत शिविर में रहने वाले बच्चों के अभिभावकों ने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण परिवार पहले ही काफी परेशान हैं। ऐसे समय में बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता भी बनी रहती है। शिविर में ही स्कूल शुरू होने से कम से कम बच्चों की पढ़ाई जारी रहने का भरोसा मिला है।स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा के समय बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन की यह पहल महत्वपूर्ण है। बाढ़ कब तक रहेगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखना उनके भविष्य के लिए जरूरी है।
राहत शिविर बना बच्चों के लिए नई उम्मीद
पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित राहत शिविर में शुरू हुआ अस्थायी विद्यालय बाढ़ पीड़ित बच्चों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आया है। एक ओर जहां बाढ़ ने लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के हाथों में फिर से कॉपी-किताब दिखाई देना राहत की तस्वीर पेश कर रहा है।प्रशासन की कोशिश है कि संकट की इस घड़ी में बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो और परिस्थितियां सामान्य होने तक उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखा जाए। बाढ़ का पानी भले ही लोगों के घरों और रास्तों तक पहुंच गया हो, लेकिन बच्चों की शिक्षा का सिलसिला टूटने न देना इस पहल का सबसे अहम उद्देश्य है।








