सुपौल,अंग भारत। जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल के तत्वावधान में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजेश कुमार बच्चन, जिला पदाधिकारी सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक के. शरथ आरएस तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने संयुक्त रूप से किया।
पत्रकारों को स्मृति पत्र देकर किया सम्मानित
राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान कुछ पत्रकारों को स्मृति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अंग भारत के संवाददाता राजीव रंजन को भी सम्मानित किया गया। उन्हें प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय के द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।इस दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामचंद्र प्रसाद, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम अफजाल अहमद समेत अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित थे।
अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों का निष्पादन करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए संबंधित पक्षकारों को पहले से ही न्यायालय की ओर से नोटिस भेजा गया है, ताकि वे लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का आपसी सहमति से समाधान करा सकें।उन्होंने कहा कि लोक अदालत लोगों को विवादों के समाधान का एक सरल और सुलभ रास्ता उपलब्ध कराती है। आपसी सहमति से छोटे से लेकर बड़े मामलों का भी निपटारा किया जा सकता है। इससे लोगों को लंबे समय तक न्यायालय में मुकदमा लड़ने की परेशानी से राहत मिलती है।
आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की अपील
जिला पदाधिकारी ने लोगों से अपील की कि जिन मामलों का समाधान आपसी सहमति से संभव है, उनका निष्पादन लोक अदालत के माध्यम से कराया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय में ही केस का निष्पादन हो जाने से समय और धन की बचत होती है। साथ ही पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का भी समाधान हो सकता है।उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को जल्द, सरल और आपसी सहमति के आधार पर न्याय उपलब्ध कराना है। लोगों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और अपने लंबित मामलों का समझौते के आधार पर निपटारा कराना चाहिए।राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर न्यायिक एवं प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी की गई थीं। अधिकारियों ने अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन के लिए संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत में पहुंचकर आपसी सहमति से विवाद खत्म करने की अपील की।








