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राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का 15 अगस्त तक हैंडओवर सुनिश्चित करने के निर्देश

सारण,अंग भारत। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, छपरा में बुनियादी ढांचे के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अस्पताल परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्य में तेजी लाना और 15 अगस्त की समय-सीमा के भीतर अस्पताल को पूरी तरह से हैंडओवर करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि निर्माण एजेंसी को हर हाल में 15 अगस्त तक सभी लंबित कार्यों को पूर्ण करना होगा, ताकि आम जनता के लिए चिकित्सा सेवाएं सुलभ हो सकें। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि अस्पताल का संचालन निर्धारित तिथि से शुरू हो जाए ताकि स्थानीय लोगों को इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा न करनी पड़े।

निरीक्षण और समीक्षा

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का बारीकी से मुआयना किया। इस निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन, सारण और अस्पताल अधीक्षक सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा के मुख्य बिंदुओं में अस्पताल की कार्यक्षमता को परखना शामिल था। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन निर्माण के साथ-साथ तकनीकी संसाधन भी सही ढंग से स्थापित किए जाएं। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया:

  • ओपीडी और इमरजेंसी: ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के बैठने और इलाज की व्यवस्था की जांच।
  • औषधि वितरण: दवाओं की उपलब्धता और वितरण प्रणाली की सुगमता सुनिश्चित करना।
  • पैथोलॉजी जांच: आधुनिक लैब की कार्यक्षमता और जांच सुविधाओं का जायजा।
  • बुनियादी सुविधाएं: अस्पताल परिसर में बिजली, शुद्ध पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन।

समयबद्ध कार्ययोजना

निर्माण कार्यों में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) के उप महाप्रबंधक को निर्देश दिया है कि वे निर्माण एजेंसी के साथ समन्वय बैठाकर एक स्पष्ट समय-सीमा तैयार करें। काम की गति बनी रहे, इसके लिए जिलाधिकारी ने राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) अधीक्षक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जिला समिति का गठन करने का आदेश दिया है। इस समिति में निदेशक एनईपी, निदेशक डीआरडीए और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (स्वास्थ्य) को शामिल किया जाएगा, जो नियमित रूप से निर्माण कार्यों की निगरानी करेंगे। प्रशासन ने एक विशेष रिपोर्टिंग तंत्र भी विकसित किया है ताकि हर दिन की प्रगति का लेखा-जोखा जिला कार्यालय तक पहुंचे।

संसाधनों का एकीकरण

अस्पताल की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने कई विभागों को आपस में जोड़ने की रणनीति बनाई है। चिकित्सा सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:

सुविधा जिम्मेदारी
जल निकासी पथ निर्माण विभाग
भोजन व्यवस्था जीविका (स्वयं सहायता समूह)
हरियाली मनरेगा
आपातकालीन सेवाएं GMCH एवं सदर अस्पताल

अस्पताल परिसर में जलभराव न हो, इसके लिए पथ निर्माण विभाग को तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने हेतु ‘जीविका’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाएगा। साथ ही, अस्पताल परिसर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए मनरेगा के माध्यम से पौधारोपण किया जाएगा। एम्बुलेंस और ब्लड बैंक की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए GMCH को सदर अस्पताल और मौजूदा ब्लड बैंक से टैग किया गया है।

चिकित्सकों को निर्देश

प्रशासन की मंशा केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को मिलने वाला उपचार भी उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सख्त लहजे में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से कहा है कि मरीजों के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार अनिवार्य है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज की शिकायतों का त्वरित निवारण करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों की देखभाल के दौरान धैर्य और संवेदनशीलता बरतने के लिए प्रेरित किया गया है।

जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि सारण के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में न केवल बेहतरीन इमारत हो, बल्कि वहां का चिकित्सा वातावरण भी मरीज-हितैषी हो। सभी अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से इन निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है।

सुधार के मानक

आने वाले समय में अस्पताल की कार्यप्रणाली में जो बदलाव देखने को मिलेंगे, उनमें मुख्य रूप से मानवीय दृष्टिकोण और प्रशासनिक तत्परता को प्राथमिकता दी गई है। अस्पताल परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी यह संदेश है कि जनता के प्रति संवेदनशीलता में कमी होने पर जवाबदेही तय की जाएगी। जिला प्रशासन के इस ठोस कदम से छपरा और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह एक प्रभावी प्रयास साबित होगा। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित अंतराल पर ऑडिट भी किया जाएगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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