रूपौली (पूर्णिया),अंग भारत। पूर्णिया के रूपौली प्रखंड में आज आग ने तीन भाइयों की जिंदगी भर की कमाई छीन ली। सिहपुर दियरा पंचायत के बेला प्रसादी गांव के वार्ड नंबर 3 में अचानक लगी आग से तीन सगे भाइयों के कच्चे बासा घर जलकर पूरी तरह राख हो गए। घर में रखा अनाज, कपड़ा, बर्तन, नकदी, ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल समेत सब कुछ जलकर खत्म हो गया।पीड़ितों की पहचान शुकदेव यादव के तीन बेटों अरुण यादव, सदानंद यादव और विंदेश्वरी यादव के रूप में हुई है। तीनों भाई अपने परिवार के साथ एक ही जगह पर अलग-अलग कच्चे फूस के घर बनाकर रहते थे। जिसे गांव में बासा घर कहा जाता है। पुराने फूस और बांस के होने के कारण आग ने पल भर में तीनों घरों को अपनी चपेट में ले लिया।
कैसे लगी आग -: ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर के समय अचानक एक घर से धुआं उठने लगा। देखा तो आग की लपटें तेज हो गई थीं। जब तक लोग समझ पाते, हवा के कारण आग दूसरे और फिर तीसरे घर तक फैल गई। शोर सुनकर बेला प्रसादी के मोहम्मद मनुरुद्दीन सहित सैकड़ों ग्रामीण दौड़े और बाल्टी, मग और पंप से पानी डालकर आग बुझाने लगे।आग इतनी तेज थी कि लोगों को पास जाने में भी डर लग रहा था। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गांव वालों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक तीनों घरों में रखा सारा सामान जल चुका था।बताया जा रहा है कि घर में खड़ा एक ट्रैक्टर और एक मोटरसाइकिल भी पूरी तरह जल गई। इसके अलावा धान, गेहूं, सरसों, कपड़े, बिस्तर, साइकिल और जरूरी कागजात भी राख हो गए। गनीमत रही कि उस वक्त घर में कोई बच्चा या महिला नहीं थी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।
परिवार खुले आसमान के नीचे -: हादसे के बाद तीनों भाई अपने परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। उनके पास न रहने को घर बचा है, न पहनने को कपड़ा। पीड़ित अरुण यादव ने रोते हुए बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर ट्रैक्टर लिया था, जिससे खेती करते थे, वो भी जल गया। अब खेती कैसे होगी, परिवार कहां रहेगा, कुछ समझ नहीं आ रहा।घटना की सूचना मिलते ही रूपौली की अंचलाधिकारी शिवानी सुरभि मौके पर पहुंचीं और जायजा लिया। उन्होंने बताया कि ये पुराने फूस के बासा घर थे, इसलिए आग तेजी से फैली। सीओ ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सरकारी नियम के मुताबिक जो भी मदद होगी, पीड़ितों को दिलाई जाएगी।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तीनों भाइयों को तुरंत इंदिरा आवास, खाने-पीने का सामान और आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वो फिर से अपना घर बसा सकें।








