कला भवन प्रबंध समिति ने ट्रैक सूट देकर किया सम्मानित, तिलक लगाकर शुभकामनाओं के साथ दल को किया रवाना
पूर्णिया,अंग भारत। बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक लोककलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से पूर्णिया के 16 सदस्यीय झिझिया नृत्य दल गुजरात के एकतानगर के लिए रवाना हो गया। वहां आयोजित समारोह में कलाकार झिझिया नृत्य की प्रस्तुति देकर बिहार की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करेंगे। कलाकारों की रवानगी से कला जगत और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।कलाकारों की विदाई से पहले कला भवन प्रबंध समिति की ओर से सभी 16 सदस्यों को विशेष रूप से तैयार ट्रैक सूट प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय मंच पर दल की एकरूपता और अनुशासन को प्रदर्शित करना था। ट्रैक सूट मिलने से कलाकारों का उत्साह भी बढ़ा।
तिलक लगाकर दी गई विदाई
मंगलवार की सुबह कला भवन परिसर में आयोजित विदाई समारोह में कला भवन प्रबंध समिति के सदस्य संजय कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार जेजानी, समिति सदस्य जयवर्धन, नाट्य विभाग के निदेशक कुंदन कुमार सिंह, रंगकर्मी शिवाजी राम राव और रेणु रंगमंच संस्थान के सचिव अजीत कुमार सिंह बप्पा मौजूद रहे। सभी ने कलाकारों को तिलक लगाकर और गले मिलकर शुभकामनाएं दीं तथा बेहतर प्रदर्शन के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।इस दौरान कला भवन प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. डी. राम और मंत्री रामनारायण सिंह के योगदान की भी सराहना की गई। समिति के सहयोग और मार्गदर्शन को इस सांस्कृतिक यात्रा की तैयारियों में महत्वपूर्ण बताया गया।
सिर पर दीयों से जगमगाता घड़ा रखकर करेंगे नृत्य
बिहार की पारंपरिक लोककलाओं में झिझिया नृत्य की विशिष्ट पहचान है। आस्था, लोकविश्वास और सामूहिक उत्सव से जुड़ी इस लोककला में कलाकार सिर पर छिद्रों वाला घड़ा रखकर नृत्य करते हैं। घड़े के भीतर जलते दीयों की रोशनी इस प्रस्तुति को आकर्षक बनाती है। पारंपरिक परिधान, लोकसंगीत और नृत्य की अनूठी शैली झिझिया को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।पूर्णिया का यह दल गुजरात में अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बिहार की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा। कलाकारों के लिए यह अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ अपनी मिट्टी की परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर भी है।
विश्वजीत कुमार सिंह कर रहे हैं दल का नेतृत्व
झिझिया नृत्य दल का नेतृत्व विश्वजीत कुमार सिंह कर रहे हैं। दल में स्नेहा झा, रिंकल कुमारी, दीपप्रिया, स्नेहा राज, लकी प्रिया, संजना दास, ज्योति कुमारी, दीक्षा कुमारी, कोमल कुमारी, साक्षी, सांधिल्या, रिया डे, प्रीति डे, आकांक्षा निशु, संजना कुमारी और शिवम कुमार शामिल हैं।यह दल अपनी पारंपरिक नृत्य शैली और लोकसंगीत के माध्यम से राष्ट्रीय मंच पर बिहार की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा प्रोत्साहन
पूर्णिया के कलाकारों की इस सांस्कृतिक यात्रा को स्थानीय कला जगत के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर झिझिया नृत्य की प्रस्तुति से लोककलाओं को प्रोत्साहन मिलने और युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलने की उम्मीद है।स्थानीय कला प्रेमियों को उम्मीद है कि पूर्णिया का यह दल अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगा और बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाने में योगदान देगा।








