बिहार,अंग भारत| पूर्णिया और कोसी-सीमांचल के निवासियों के लिए बिजली की समस्याओं से जूझने के दिन अब समाप्त होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। लोकसभा में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सक्रियता के चलते केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के लिए एक विशेष ऊर्जा कार्ययोजना को मंजूरी दी है। विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाईक ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि भवानीपुर और कस्बा जैसे क्षेत्रों में नए ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे लो-वोल्टेज और बिजली कटौती की पुरानी समस्या का समाधान निकलेगा। सरकार वर्ष 2031-32 तक देश की कुल बिजली क्षमता को 874 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसमें बिहार के लिए 12,500 करोड़ रुपये का भारी निवेश प्रस्तावित है।
संसद में बिजली मुद्दा
कोसी और सीमांचल क्षेत्र के जिलों, जिनमें कटिहार, अररिया और किशनगंज भी शामिल हैं, में अक्सर बिजली की आंख-मिचौनी लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा के पटल पर इस विषय को गंभीरता से रखते हुए सरकार से पूछा कि क्या आगामी वर्षों के लिए कोई पुख्ता रोडमैप तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि प्रधान इस अंचल में फसलों की सिंचाई और स्थानीय लघु उद्योगों को चलाने के लिए चौबीस घंटे निर्बाध बिजली मिलना नितांत आवश्यक है। इस मांग के जवाब में केंद्र ने न केवल ग्रिड निर्माण की बात स्वीकार की, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनों के जाल को बिछाने की समयबद्ध योजना भी साझा की।
राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्य
विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाईक ने सदन को जानकारी दी कि भारत का भविष्य कोयले के साथ-साथ सौर, पवन, परमाणु और जल विद्युत पर टिका है। सरकार कुल 1.05 लाख मेगावाट के नए थर्मल पावर प्लांट विकसित करने में जुटी है। देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2032 तक 1.91 लाख सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह विशाल बुनियादी ढांचा एक राज्य की अतिरिक्त बिजली को दूसरे राज्य में भेजने में मददगार साबित होगा, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन बना रहेगा।
राज्य की बड़ी परियोजनाएं
बिहार के संदर्भ में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर दो प्रमुख केंद्रों पर काम जारी है। औरंगाबाद जिले के नवीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट में 800-800 मेगावाट की दो इकाइयां विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही भागलपुर के पीरपैंती में अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट पर तेजी से काम चल रहा है, जहां 800 मेगावाट की चार इकाइयों से बिजली का उत्पादन होगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।
सीमांचल का नया ग्रिड
सांसद पप्पू यादव द्वारा उठाए गए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। निम्नलिखित तालिका कोसी-सीमांचल की आगामी परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करती है:
| परियोजना का नाम | क्षमता | लक्षित वर्ष | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| भवानीपुर ग्रिड सब-स्टेशन | 132/33 केवी | 2028-29 | भवानीपुर, धमदाहा, बनमनखी |
| धमदाहा-बनमनखी लाइन | 132 केवी | 2028-29 | पूर्णिया ग्रामीण |
| कस्बा ग्रिड सब-स्टेशन | 220/132 केवी | 2030-31 | कस्बा, जलालगढ़ |
| कटिहार-कस्बा लाइन | 220 केवी | 2030-31 | पूर्णिया-कटिहार सीमा |
आने वाले समय में कस्बा में बनने वाला ग्रिड सब-स्टेशन पूरे सीमांचल क्षेत्र के लिए ‘पावर हब’ के रूप में काम करेगा, जिससे वोल्टेज की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
वितरण ढांचे में सुधार
बिजली के सुचारू वितरण के लिए सरकार ने संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत एक व्यापक बजट आवंटित किया है। इस सुधार के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं:
- बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण: 10,559 करोड़ रुपये की लागत से पुराने तारों को बदलकर एरियल बंच्ड केबल लगाई जा रही है। साथ ही नए ट्रांसफार्मर और कृषि फीडरों का निर्माण किया जा रहा है।
- स्मार्ट मीटरिंग: कुल 2,021 करोड़ रुपये का निवेश करके स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, ताकि बिजली चोरी को रोका जा सके और बिलिंग में पारदर्शिता आए।
इन तमाम सुधारों को 31 मार्च 2028 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य है। बांस-बल्लों के सहारे बिजली पहुंचाने की कुप्रथा को समाप्त कर सुरक्षित केबल बिछाने का कार्य पूर्णिया के सुदूरवर्ती गांवों में भी किया जा रहा है।
कृषि और उद्योग विकास
कोसी अंचल के किसान लंबे समय से महंगे डीजल पंपों पर निर्भर हैं। बिजली की नियमित आपूर्ति मिलते ही खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी, जिससे मक्का, जूट और धान के उत्पादकों को सीधे लाभ होगा। इसके अलावा, बेहतर बिजली व्यवस्था के कारण लघु उद्योग स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। स्थानीय युवाओं को काम के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा क्योंकि उनके गृह जनपद में ही औद्योगिक इकाइयां स्थिर वोल्टेज के साथ कार्य करने में सक्षम होंगी। सांसद पप्पू यादव की पहल से एक ऐसे भविष्य की नींव पड़ रही है, जहां कोसी-सीमांचल बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होगा।








