तेहरान/मास्को/इस्लामाबाद,अंग भारत। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने महज 48 घंटों के भीतर तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचकर संकेत दे दिया है कि संकट को बातचीत से सुलझाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर बना हुआ है।
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रूस दौरे के बाद सीधे पाकिस्तान पहुंचे अराघची
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात के तुरंत बाद अराघची का इस्लामाबाद पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना देता है। दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई, जिसमें युद्ध, आक्रामकता और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की गई। अराघची ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ईरान और रूस के संबंध अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंच चुके हैं।
पाकिस्तान निभा रहा अहम मध्यस्थ की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है। वह दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अराघची की लगातार पाकिस्तान यात्राएं इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही हैं। इससे पहले वह रविवार रात पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात कर सीधे रूस रवाना हुए थे।
मध्य पूर्व में शांति के लिए रूस भी सक्रिय
रूस ने भी इस पूरे घटनाक्रम में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि उनका देश मध्य पूर्व में जल्द से जल्द शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता लगाने को तैयार है। उन्होंने ईरान के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि ईरानी जनता अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है और उम्मीद है कि वह इस कठिन दौर से बाहर निकलेगी।
संघर्ष से सभी देशों के हितों को नुकसान
रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता संघर्ष किसी के हित में नहीं है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने संकेत दिए कि मॉस्को इस संकट को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान, रूस और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां इस ओर इशारा करती हैं कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा समाधान तलाशा जा रहा है। हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार बैठकों और दौरों से उम्मीद जरूर जगी है कि जल्द ही हालात में सुधार हो सकता है।










