वाशिंगटन/दोहा/तेहरान,अंग भारत। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को 14 सूत्रीय नया शांति प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर संदेह जताते हुए साफ कर दिया है कि उन्हें फिलहाल किसी समझौते की उम्मीद नहीं दिख रही है।राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस प्रस्ताव की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से प्रस्ताव मिला है, लेकिन अभी तक उन्होंने इसे विस्तार से नहीं देखा है। ट्रंप ने कहा कि वह प्रस्ताव की गहराई से समीक्षा करेंगे, जिसके बाद ही अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आएगी।
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प्रस्ताव में युद्ध रोकने और नाकाबंदी हटाने की मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के इस प्रस्ताव में आक्रमण न करने की गारंटी, आर्थिक नाकाबंदी हटाने और लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की मांग शामिल है। हालांकि, ट्रंप ने शुरुआती प्रतिक्रिया में ही साफ संकेत दे दिया कि यह प्रस्ताव अमेरिकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सकता।ट्रंप ने बाद में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान का प्रस्ताव स्वीकार्य होगा और ईरान को अपने पिछले दशकों के व्यवहार की पूरी कीमत अभी चुकानी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस प्रस्ताव को एयरफोर्स वन में पढ़ेंगे।
ट्रंप का कड़ा रुख, सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप ने ईरान की स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की हालत काफी खराब हो चुकी है और उसे सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान की ओर से कोई उकसाने वाली कार्रवाई हुई तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले करने से पीछे नहीं हटेगा।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्तमान समय में ईरान का स्पष्ट और सर्वमान्य नेतृत्व कौन कर रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।
आईआरजीसी ने दी जवाबी प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है। आईआरजीसी ने कहा कि वह अमेरिका के साथ किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
कतर ने दी शांति और संयम की सलाह
इस बढ़ते टकराव के बीच कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी ने ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची से बातचीत कर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि देश मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करता है और चाहता है कि सभी पक्ष सकारात्मक रुख अपनाएं, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो सके।
तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें जारी
व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि निक स्टीवर्ट को ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल किया गया है। उन्हें एक अनुभवी नीति विशेषज्ञ माना जाता है और वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की टीम का हिस्सा होंगे।मध्य पूर्व में हालिया सैन्य घटनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच यह प्रस्ताव और उस पर अमेरिका की प्रतिक्रिया आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है।









