Founder – Mohan Milan

छात्रों के साथ कथित बर्बरता पर राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना, अमित शाह को लिखा पत्र

दिल्ली छात्र आंदोलन के बाद गृह मंत्री अमित शाह को तीखा पत्र लिखते कांग्रेस नेता राहुल गांधी की फाइल फोटो

नई दिल्ली,अंग भारत। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक तीखा पत्र लिखकर देश की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित हिंसक बल प्रयोग पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या गृह मंत्रालय ने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन और आंसू गैस जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की मंजूरी दी थी? इस पत्र के जरिए राहुल गांधी ने न केवल पीड़ित छात्र साहिल लोचब की गंभीर स्थिति का हवाला दिया है, बल्कि पुलिस कार्रवाई के दौरान सादे कपड़ों में लाठियां बरसाने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान और उनकी तैनाती पर भी गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल खड़े किए हैं।

छात्रों पर बर्बरता

यह पूरा विवाद एक शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के इर्द-गिर्द घूमता है। छात्र देश में एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर सड़क पर उतरे थे। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे इन नौजवानों पर अचानक सुरक्षा बलों ने धावा बोल दिया। राहुल गांधी का आरोप है कि छात्रों की जायज मांगों को सुनने और उनके साथ सार्थक बातचीत करने के बजाय उन पर बर्बरता से बल प्रयोग किया गया। इस हिंसक कार्रवाई में आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठियां चलाई गईं। इस झड़प में सैकड़ों की संख्या में छात्र और कई मीडियाकर्मी गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं। पुलिस की इस तरह की अप्रत्याशित कार्रवाई ने देश के बौद्धिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।

पैलेट गन का दर्द

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल रही। आमतौर पर अशांत क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली पैलेट गन का प्रयोग दिल्ली में छात्रों के खिलाफ देखकर हर कोई दंग है। राहुल गांधी ने खुद 19 साल के पीड़ित छात्र साहिल लोचब से मुलाकात की। साहिल की एक आंख में पैलेट गन का छर्रा लगा है, जिससे उनके देखने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। एक युवा छात्र, जो अपने बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठा रहा था, आज अस्पताल के बिस्तर पर अपनी आंखों की रोशनी बचाने की जंग लड़ रहा है। मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस भयावह मंजर की गवाही दे रहे हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

शाह से तीखे सवाल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस पत्र को साझा करते हुए सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने पत्र में दो बेहद गंभीर और सीधे सवाल दागे हैं, जिनका जवाब पूरा देश जानना चाहता है:

  • पहला सवाल: क्या देश के गृह मंत्री के रूप में आपने खुद प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पैलेट गन जैसे जानलेवा और घातक हथियारों के इस्तेमाल की हरी झंडी दी थी? यदि गृह मंत्रालय ने ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी, तो फिर किस अधिकारी के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने इस खतरनाक कदम को अंजाम दिया?
  • दूसरा सवाल: प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी के बिना, सादे कपड़ों में जो लोग छात्रों को बेरहमी से लाठियों से पीट रहे थे, वे असल में कौन थे? क्या वे दिल्ली पुलिस के ही गुप्त सिपाही थे या फिर किसी राजनीतिक दल के स्वयंसेवक थे? उन्हें भीड़ में घुसकर छात्रों पर हमला करने की इजाजत आखिर किसने दी?

पुलिस कार्रवाई पर आंकड़े

इस घटना के बाद पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों को नीचे दी गई तालिका के जरिए आसानी से समझा जा सकता है:

कार्रवाई का प्रकार असर और नुकसान मुख्य कानूनी सवाल
पैलेट गन का प्रयोग साहिल लोचब समेत कई छात्र गंभीर रूप से घायल, आंखों की रोशनी जाने का खतरा क्या भीड़ नियंत्रण के लिए यह बल प्रयोग न्यायोचित और कानून सम्मत था?
सादे कपड़ों में लाठीचार्ज प्रदर्शनकारियों में दहशत, पुलिस की पहचान पर गहरा संदेह बिना वर्दी के बल प्रयोग करने का कानूनी अधिकार किसे मिला?
आंसू गैस और बल प्रयोग पत्रकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गंभीर शारीरिक चोटें क्या बातचीत के शांतिपूर्ण रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया था?

विरोध का लोकतांत्रिक अधिकार

भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार देता है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाना किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं माना जा सकता। सरकार का प्राथमिक कर्तव्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि अपने नागरिकों और खासकर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। जब सरकारें युवाओं के साथ अपराधियों जैसा सलूक करने लगती हैं, तो व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास कमजोर होने लगता है। संवाद ही हर जटिल समस्या का एकमात्र हल है, न कि लाठी और पैलेट गन की गोलियां। युवाओं की आवाज दबाने की जगह उनकी जायज मांगों को सुना जाना चाहिए।

जवाबदेही तय हो

अब समय आ गया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के नियंत्रण में आते हैं। ऐसे में गृह मंत्री की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। छात्रों के खिलाफ हुए इस अमानवीय व्यवहार के पीछे जो भी अधिकारी या बल जिम्मेदार हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि सरकार इस मुद्दे पर खामोश रहती है, तो यह माना जाएगा कि वह युवाओं की आवाज को बलपूर्वक दबाने की कोशिशों का समर्थन कर रही है। देश का भविष्य हमारे युवा हैं, और उनके साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon