ग्लासगो, अंग भारत। भारतीय भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीत लिया है। शनिवार को हुए इस रोमांचक मुकाबले में उन्होंने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया और भारत को इन खेलों का दूसरा रजत पदक दिलाया। उनकी इस कामयाबी ने न केवल भारतीय प्रशंसकों को झूमने का मौका दिया है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के वेटलिफ्टिंग कौशल को एक बार फिर साबित किया है।
मुकाबले का पूरा रोमांच
इस स्पर्धा में पोडियम तक पहुंचने की जंग बेहद करीबी और कांटे की थी। शुरुआत से ही खिलाड़ियों के बीच एक-एक किलोग्राम वजन को लेकर होड़ मची रही। स्वर्ण पदक पर मलेशिया के अनुभवी खिलाड़ी अज़निल बिन बिदिन मोहम्मद ने कब्जा जमाया। उन्होंने कुल 299 किलोग्राम का भारी-भरकम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं, पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू भी पीछे नहीं रहे; उन्होंने कुल 282 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। राजा मुथुपांडी ने सूझबूझ और गजब के मानसिक संतुलन का परिचय देते हुए बारू को पीछे छोड़ा और रजत पदक सुरक्षित किया।
| स्थान | खिलाड़ी का नाम | देश | कुल वजन (Kg) |
|---|---|---|---|
| स्वर्ण पदक | अज़निल बिन बिदिन मोहम्मद | मलेशिया | 299 |
| रजत पदक | राजा मुथुपांडी | भारत | 286 |
| कांस्य पदक | मोरिया बारू | पापुआ न्यू गिनी | 282 |
राजा का शानदार सफर
मात्र 22 साल की उम्र में राजा मुथुपांडी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह उनकी बरसों की तपस्या का परिणाम है। यह उनके राष्ट्रमंडल खेलों के करियर का पहला पदक है। इससे पहले वह साल 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में छठे स्थान पर रहे थे। उस समय पदक से चूकने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि अपनी कमियों पर काम किया। इसके बाद, अगस्त 2025 में आयोजित राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया था।
“गोल्ड कोस्ट की नाकामी से लेकर ग्लासगो में पदक जीतने तक का सफर राजा के कड़े अनुशासन और खुद पर भरोसे की कहानी कहता है।”
पुरानी हार से सीख
खेलों की दुनिया में वही खिलाड़ी टिक पाता है जो अपनी गलतियों से सीखता है। राजा ने गोल्ड कोस्ट में छठे स्थान पर रहने के बाद अपनी तकनीक को पूरी तरह सुधारा। भारोत्तोलन जैसे खेल में ताकत के साथ-साथ सही समय पर सही तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। राजा ने अपने कोच के साथ मिलकर अपनी लिफ्टिंग स्टाइल और ग्रिप पर काम किया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
वेटलिफ्टिंग के तकनीकी पहलू
एक आम दर्शक के लिए भारोत्तोलन सिर्फ वजन उठाने का खेल हो सकता है, लेकिन इसमें बारीकियों का बहुत बड़ा रोल होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खेल को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है, जो किसी भी लिफ्टर की क्षमता को पूरी तरह परखते हैं:
- स्नैच लिफ्ट: इसमें खिलाड़ी को एक ही झटके में बारबेल को जमीन से सीधे अपने सिर के ऊपर उठाना होता है। इसमें शरीर का संतुलन और हाथों की ताकत सबसे अहम होती है।
- क्लीन एंड जर्क: यह दो चरणों में पूरी होने वाली लिफ्ट है। पहले चरण में वजन को छाती तक लाया जाता है और फिर दूसरे चरण में पैरों के सहारे उसे सिर के ऊपर सीधा किया जाता है।
इन दोनों श्रेणियों में उठाए गए वजन को जोड़कर ही अंतिम स्कोर तय किया जाता है। राजा मुथुपांडी ने इन दोनों ही क्षेत्रों में बेहतरीन तकनीक और गजब के तालमेल का प्रदर्शन किया, जिससे वे पदक जीतने में सफल रहे।
भारत की पदक तालिका
राजा मुथुपांडी के इस बेहतरीन प्रदर्शन के साथ ही राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के पदकों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यह बेहद गर्व की बात है कि भारत के खाते में अब एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। भारत की इस बढ़त ने खेल प्रेमियों का उत्साह दोगुना कर दिया है। आने वाले दिनों में कई अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें बंधी हुई हैं।
आगे की राह
इस पदक के बाद राजा मुथुपांडी की नजरें अब आने वाली वैश्विक प्रतियोगिताओं पर टिकी होंगी। 22 वर्षीय इस युवा खिलाड़ी में आगे और भी बेहतर करने की अपार क्षमता है। भारतीय खेल संघ और प्रशंसकों को उम्मीद है कि राजा इसी तरह अपनी फॉर्म को बरकरार रखेंगे और भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी तिरंगा लहराएंगे।







