गुवाहाटी,अंग भारत। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम का जीवन केवल उपलब्धियों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने साधारण परिस्थितियों से उठकर भारत को वैश्विक मंच पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। उन्होंने न केवल देश की रक्षा प्रणाली को मिसाइल तकनीक के माध्यम से मजबूत किया, बल्कि अपनी सादगी और विचारों से करोड़ों भारतीयों के दिलों में एक अटूट स्थान भी बनाया।
एक महान वैज्ञानिक का सफर
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक बेहद सामान्य परिवार में हुआ था। अखबार बेचने से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक मिसाल है। उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में अपनी सेवाएं देकर भारत के तकनीकी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया।
मिसाइल मैन की भूमिका
डॉ. कलाम को ‘मिसाइल मैन’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी मिसाइलों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उनके नेतृत्व में हुए पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षण ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। उनके कुछ प्रमुख योगदान इस प्रकार हैं:
- SLV-III उपग्रह प्रक्षेपण यान के माध्यम से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई दी।
- बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।
- रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा और उसे सच किया।
जनता के राष्ट्रपति
जब वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन को ‘आम जनता के लिए खोल दिया’। उन्हें सही मायनों में ‘जनता का राष्ट्रपति’ कहा जाता है। उन्होंने सत्ता की चकाचौंध से दूर हमेशा छात्रों और युवाओं के साथ संवाद करना पसंद किया। उनके लिए विज्ञान का अर्थ केवल प्रयोगशालाएं नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार लाना था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
डॉ. कलाम का मानना था कि भारत की असली संपत्ति इसके युवा हैं। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ और ‘इंडिया 2020’ के जरिए देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का मंत्र दिया। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भी अपने संदेश में इसी बात को रेखांकित किया कि डॉ. कलाम की सादगी और राष्ट्रवाद की भावना आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी युवाओं को प्रेरित कर रही है।
डॉ. कलाम की सीख
उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने हमेशा कहा था कि “सपने वो नहीं जो नींद में आते हैं, सपने वो हैं जो सोने नहीं देते।” उनकी यह सीख आज के दौर में भी उतनी ही सटीक है।
| क्षेत्र | महत्वपूर्ण कार्य |
|---|---|
| अंतरिक्ष विज्ञान | रोहिणी उपग्रह प्रक्षेपण |
| रक्षा तकनीक | स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम |
| शिक्षा | छात्रों के साथ निरंतर संवाद |
“जीवन में कठिनाइयां हमें बर्बाद करने नहीं आतीं, बल्कि यह हमें हमारी छिपी हुई शक्तियों और शक्तियों को पहचानने में मदद करती हैं।” – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
असम के मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण में दिया गया उनका समय और समर्पण आने वाली कई सदियों तक भारत को प्रेरणा देता रहेगा। डॉ. कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे नेक हों, तो कोई भी उपलब्धि नामुमकिन नहीं है। वे हमेशा एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने विज्ञान को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाया।







