नई दिल्ली, अंग भारत। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर संसद की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने और लोकतंत्र के मंदिर का समय बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान यह दावा किया कि विपक्ष संसद के मानसून सत्र में लगातार व्यवधान पैदा कर रहा है। भाजपा के अनुसार, संसद के एक सत्र पर करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होता है, लेकिन हंगामे के कारण प्रश्नकाल और जीरो आवर की कार्यवाही ठप पड़ी है। इसका सीधा असर जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर पड़ रहा है, जिससे देश को आर्थिक और नीतिगत स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विपक्ष का सेलेक्टिव रवैया
संबित पात्रा ने कांग्रेस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘सेलेक्टिव’ विरोध का नाम दिया। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष वास्तव में युवाओं और छात्रों के हितों के प्रति ईमानदार है, तो झारखंड में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा को लेकर संघर्षरत हजारों युवाओं की पीड़ा संसद में क्यों नहीं गूंज रही है? संबित पात्रा के मुताबिक, झारखंड के इन युवाओं के मसले पर कांग्रेस की चुप्पी उनके दोहरे चरित्र को उजागर करती है। तख्तियां लेकर सदन में हंगामा करने वाले विपक्षी नेता इन गंभीर मुद्दों पर मौन साधे हुए हैं, जो यह साबित करता है कि उनका विरोध केवल राजनीतिक चश्मे से प्रेरित है।
संबित पात्रा ने कहा कि जब बात अपने ही राज्यों या सरकारों की आती है, तो कांग्रेस के शीर्ष नेता चुप्पी साध लेते हैं, जबकि अन्य मुद्दों पर वे संसद की गरिमा को दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटते।
झारखंड और कर्नाटक संकट
संबित पात्रा ने झारखंड और कर्नाटक के प्रकरणों को जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। झारखंड में जहां जेपीएससी अभ्यर्थी भविष्य बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, वहीं कर्नाटक में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक ने हजारों मेधावी छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील है। जब पीड़ित छात्रों ने कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे से इस मामले में जवाबदेही की मांग की, तो उनका जवाब बेहद अपमानजनक था।
प्रियंक खरगे की असंवेदनशीलता
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया कि कर्नाटक में पेपर लीक मामले पर सवाल पूछने वाले छात्रों से प्रियंक खरगे ने यह तक कह दिया कि वे पहले 25 दिन तक भूख हड़ताल करें, उसके बाद लाठीचार्ज होगा और फिर कहीं जाकर वह अपने इस्तीफे पर विचार करेंगे। संबित पात्रा ने इस बयान को अमानवीय बताते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर होकर किसी जिम्मेदार मंत्री का युवाओं के प्रति ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस आलाकमान अपने मंत्री की इस भाषा का समर्थन करता है?
शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी
भाजपा ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में है। इन घटनाओं पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की खामोशी कई सवाल खड़े करती है:
- संबित पात्रा ने दावा किया कि कर्नाटक पुलिस भर्ती पेपर लीक विवाद के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन ज्वलंत मुद्दों पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
- संसद के भीतर मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा की बात तो की, लेकिन कर्नाटक की घटनाओं को उन्होंने अपने भाषण से पूरी तरह गायब रखा।
विधेयकों का ठप कामकाज
भाजपा का स्पष्ट कहना है कि सदन का कीमती समय बर्बाद करने का सबसे बड़ा खामियाजा उन महत्वपूर्ण कानूनों को उठाना पड़ रहा है जो आम जनता के लिए आवश्यक हैं। नीचे दी गई तालिका में उन विधेयकों का विवरण है जो हंगामे की बलि चढ़ रहे हैं:
| विधेयक का नाम | महत्वपूर्ण पहलू |
|---|---|
| जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 | नागरिकों के डेटा को आधुनिक बनाने और डिजिटल सुरक्षा के लिए यह एक बड़ा कदम है। |
| बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 | वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यह बिल बैंक खाताधारकों की सुरक्षा और साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने वाला है। |
संबित पात्रा ने चेतावनी दी कि विपक्ष केवल ‘हुड़दंग’ में विश्वास रखता है, जबकि देश की जनता ने उन्हें सदन में जनहित के मुद्दों पर संवाद करने के लिए भेजा है। जब तक विपक्ष की ओर से संसद में सार्थक संवाद का रास्ता नहीं अपनाया जाता, तब तक विकास की गति प्रभावित होती रहेगी। यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि कैसे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यकुशलता लगातार घट रही है। भाजपा के अनुसार, विपक्ष को अपने इन दोहरे मानदंडों को त्यागकर देशहित में चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए, ताकि लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे।








