अमरपुर/बांका/अंग भारत| अमरपुर प्रखंड की जर्जर सड़कें और टूटते हुए पुल-पुलिया अब स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। मुख्य मार्गों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक का जाल बदहाल है, जिससे न केवल लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि हर कदम पर जान का खतरा भी बना हुआ है। सड़कों पर पड़े बड़े-बड़े गड्ढे और पुलों का बाहर निकला हुआ सरिया प्रशासन की उदासीनता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं, जबकि जवाबदेह अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
संग्रामपुर पुलिया: मौत का साया
अमरपुर-शाहकुंड (SH-25) मुख्य मार्ग पर संग्रामपुर गांव के पास स्थित पुलिया की हालत सबसे भयावह है। यह पुलिया आज अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। इसकी स्लैब टूट चुकी है और लोहे के छड़ें (सरिया) पूरी तरह बाहर निकल आए हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से रोज हजारों भारी वाहन, स्कूली बसें और एंबुलेंस गुजरती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के अंधेरे में बाइक सवार अक्सर अनियंत्रित होकर इन गड्ढों में गिर जाते हैं। यहाँ कोई भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया है, जो किसी बड़ी दुर्घटना को न्यौता देने जैसा है।
अहम मार्गों की दयनीय स्थिति
समस्या सिर्फ एक पुलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा इलाका ही खतरनाक सड़कों के जाल में फंसा हुआ है। मुख्य सड़कों की हालत का विवरण नीचे दिया गया है:
- इंगलिशमोड़-शंभुगंज मार्ग: शाहपुर चौक के पास सड़क और पुल दोनों का नामोनिशान मिट चुका है।
- इंगलिशमोड़-पुनसिया मार्ग: मादाचक, सिमरपुर और जैठोर के पास स्थित पुलिया पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।
- जैठोर पुल: इस पुल का एक हिस्सा टूटकर अलग हो गया है, जिस कारण वाहन चालक हिचकोले खाकर गुजरने को मजबूर हैं।
निर्माण की खराब गुणवत्ता
करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों का कुछ ही महीनों में टूट जाना बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि संवेदकों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया है। पुलों के ढलाई में सीमेंट और बालू का अनुपात सही नहीं रखा गया, जिससे वे पहली बरसात का दबाव भी नहीं झेल सके। समय पर मरम्मती न होने का खामियाजा आज आम जनता अपनी गाड़ियों के टूट-फूट और दुर्घटनाओं के रूप में भुगत रही है।
वाहन चालकों का दर्द
इन रास्तों पर सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। वाहन चालकों को होने वाली समस्याओं में शामिल हैं:
- गाड़ियों के सस्पेंशन और टायर का बार-बार खराब होना।
- लंबे ट्रैफिक जाम के कारण कीमती समय की बर्बादी।
- धूल और कीचड़ के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
- रात में यात्रा करते समय दुर्घटना होने का मानसिक तनाव।
बरसात में बढ़ेगा खतरा
जैसे-जैसे मानसून करीब आ रहा है, स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। अगर इन पुलियों की मरम्मत नहीं की गई, तो जलभराव के कारण इनका बचा हुआ हिस्सा भी बह सकता है। ऐसे में कई गांवों का संपर्क अमरपुर शहर से पूरी तरह टूट जाएगा, जो आपातकालीन स्थिति में जानलेवा साबित हो सकता है। पिछली बरसात का अनुभव भी यही रहा है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण ग्रामीणों को हफ्तों तक कीचड़ और गड्ढों से जूझना पड़ता है।
प्रशासन से तीखी मांग
क्षेत्रीय लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
“हम केवल मरम्मत नहीं, बल्कि गुणवत्ता की जांच चाहते हैं। दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और खतरनाक पुलों के लिए तत्काल वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए।”
ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आगामी दिनों में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए मजबूर होंगे। सरकार और लोक निर्माण विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाते हुए जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है और सड़कों की मरम्मत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए।








